लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तैयारियां तेज हो गई हैं। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। कांग्रेस ने सपा नेतृत्व को करीब 200 विधानसभा सीटों की सूची सौंपकर उन पर अपनी दावेदारी पेश की है। वहीं, समाजवादी पार्टी अपने हिस्से में अधिक सीटें रखने की तैयारी में है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अहम हो गई है।
कांग्रेस ने सौंपी 200 सीटों की सूची
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने उन विधानसभा क्षेत्रों को अपनी सूची में शामिल किया है, जहां पार्टी अपनी राजनीतिक स्थिति और संगठन की सक्रियता के आधार पर मजबूत दावेदारी मानती है। सूची में उन सीटों को भी प्राथमिकता दी गई है, जहां कांग्रेस के सांसद हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से यह सूची गोपनीय तरीके से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचाई गई है।
कांग्रेस की ओर से सीटों की मांग को लेकर दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के बीच मंथन भी हुआ। बैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के नेताओं से अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का फीडबैक लिया गया। इसी आधार पर सीटों की सूची तैयार कर सपा नेतृत्व को भेजे जाने की बात कही जा रही है।
सीटों की संख्या पर दोनों दलों के अलग-अलग रुख
सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों की प्राथमिकताएं अलग दिखाई दे रही हैं। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस गठबंधन में 125 से 130 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि सपा की ओर से उसे 40 से 50 सीटें देने की बात सामने आई है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से 175 से 200 सीटों की शुरुआती सूची सौंपे जाने की जानकारी भी अन्य मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। ऐसे में सूची में शामिल सीटों और अंतिम मांग के बीच अंतर हो सकता है।
सपा नेतृत्व का तर्क बताया जा रहा है कि सीटों का बंटवारा केवल मांग के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र में जीत की संभावना और उम्मीदवार की स्थिति को देखकर होना चाहिए। पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को भी अपनी बातचीत का आधार बना रही है।
340 से 350 सीटों पर लड़ने की तैयारी में सपा
समाजवादी पार्टी इस बार भी प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 340 से 350 सीटों पर अपने चुनाव चिह्न के साथ प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने 347 सीटों पर अपने सिंबल से चुनाव लड़ा था और शेष सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी थीं।
सपा नेतृत्व का मानना है कि अधिक सीटों पर अपने चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ने से पार्टी को अपनी संगठनात्मक ताकत के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है।
संभावित उम्मीदवारों के नाम भी मांगे
सूत्रों के अनुसार, सपा ने कांग्रेस से उन सीटों पर संभावित प्रत्याशियों के नाम भी मांगे हैं, जिन पर पार्टी दावा कर रही है। इससे दोनों दलों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार हैं और कहां सपा के पास बेहतर विकल्प मौजूद हैं।
फिलहाल सपा ने कांग्रेस की दावेदारी वाली सीटों पर बातचीत पूरी होने तक अपने आधिकारिक प्रत्याशियों की घोषणा नहीं करने का फैसला किया है। अब सबकी नजर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है। सीटों की संख्या के साथ-साथ उम्मीदवारों की स्थिति और क्षेत्रीय समीकरण भी गठबंधन के अंतिम फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।