तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। दोनों देशों के बीच टकराव टालने के लिए कतर मध्यस्थता कर रहा है। शुक्रवार को तेहरान में कतर के मध्यस्थों और ईरानी पक्ष के बीच 12 घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई। अब यह वार्ता कतर की राजधानी दोहा में आगे बढ़ने की बात कही जा रही है। इसी बीच मीडिया रिपोर्टों में 4 नवंबर के बाद ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका जताई गई है। इजरायल में 80 से अधिक अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों की तैनाती का दावा भी सामने आया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कतर की मध्यस्थता से तनाव कम करने की कोशिश
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को तेहरान में हुई लंबी बैठक का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता दोबारा खोलना था। इस दौरान कतर के मध्यस्थ व्हाइट हाउस के संपर्क में भी रहे। एक राजनयिक सूत्र ने बातचीत में सकारात्मक प्रगति होने का दावा किया है।
कतर चाहता है कि दोनों देश कुछ ऐसे शुरुआती कदम उठाने पर सहमत हों, जिन्हें कम समय में लागू किया जा सके। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य विवादित मुद्दों पर सीधी बातचीत शुरू हो सके। बताया जा रहा है कि शनिवार को दोहा में भी इस दिशा में चर्चा जारी रहेगी।
अमेरिका और ईरान की शर्तें बनीं बड़ी बाधा
बातचीत के रास्ते में दोनों देशों की अलग-अलग शर्तें चुनौती बनी हुई हैं। अमेरिका चाहता है कि वार्ता दोबारा शुरू होने से पहले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायत दे।
वहीं ईरान की मांग है कि अमेरिका पहले अपना नौसैनिक प्रतिबंध हटाए, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करे और उसे तेल बेचने की अनुमति दे। कतर इन मांगों के बीच समझौते का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, कतर ईरान से उन परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को जाने देने की अपील कर रहा है, जिन पर पहले बमबारी हुई थी। इसके बदले अमेरिका की ओर से कुछ प्रतिबंधों में राहत दिए जाने का प्रस्ताव चर्चा में है।
ईरान में परमाणु हथियार बनाने की मांग तेज
कूटनीतिक बातचीत के साथ ईरान के भीतर परमाणु नीति को लेकर भी बहस तेज हो गई है। 30 अक्टूबर को जुमे की नमाज के दौरान इमाम मोहम्मद-जवाद हज-अली-अकबरी ने अपने भाषण में परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि परमाणु नीति में बदलाव अब देश की राष्ट्रीय मांग बन चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत लोग इस बदलाव का समर्थन करते हैं। हालांकि, इस आंकड़े के समर्थन में किसी सर्वेक्षण का स्रोत नहीं बताया गया।
ईरानी संसद के प्रेसीडियम के सदस्य अलीरेजा सलीमी ने भी परमाणु नीति बदलने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जरूरत पड़ने पर संसद इस विषय पर विधेयक ला सकती है। सलीमी ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने को ईरान का अधिकार बताया और कहा कि इससे संबंधित एक विधेयक संसद के पास है।
इजरायल में अमेरिकी विमानों की तैनाती का दावा
इस बीच इजरायल के चैनल 14 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 80 से अधिक अमेरिकी हवाई ईंधन भरने वाले विमान इजरायल में तैनात किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 48 घंटों में पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य विमानों की आवाजाही बढ़ी है। इसमें कम से कम 10 भारी मालवाहक विमान और करीब 80 रिफ्यूलिंग टैंकर शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इन विमानों की संख्या और उनके इजरायल पहुंचने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों की ओर से भी इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
4 नवंबर के बाद हमले की आशंका वाली रिपोर्ट
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका ने पश्चिम एशिया के देशों को 4 नवंबर के बाद ईरान पर सीमित लेकिन तेज हमलों की आशंका को लेकर तैयार रहने को कहा है। यह तारीख अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के अगले दिन की है। हालांकि, संभावित हमले को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
फिलहाल एक तरफ कतर की मध्यस्थता से बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ सैन्य गतिविधियों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दिए जा रहे बयानों ने क्षेत्रीय तनाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में दोहा की बातचीत और अमेरिका-ईरान के रुख पर सभी की नजरें रहेंगी।