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योगी सरकार की 2022 की पहल के तहत अब तक एक लाख से अधिक लाउडस्पीकर हटाए गए

स्पीकर

सोर्स । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में धार्मिक स्थलों पर अवैध लाउडस्पीकरों के खिलाफ पुलिस का अभियान एक बार फिर तेज हो गया है। रविवार को वजीरगंज क्षेत्र में पुलिस ने कई मस्जिदों और मंदिरों से अनधिकृत साउंड सिस्टम हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने इस दौरान धार्मिक नेताओं से मुलाकात कर तेज आवाज़ वाले लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी।

यह अभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की उस राज्यव्यापी पहल का हिस्सा है, जिसे वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। इस पहल के तहत प्रदेश भर में अब तक एक लाख से अधिक अवैध लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं और करीब डेढ़ लाख लाउडस्पीकरों की आवाज़ निर्धारित मानक स्तर तक कम की गई है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि धार्मिक या सार्वजनिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रविवार को हुई कार्रवाई में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम सबसे पहले गोलागंज स्थित मोलसरी मस्जिद पहुँची। वहां अधिकारियों ने मस्जिद के इमाम से बातचीत कर लाउडस्पीकर की ऊँचाई और ध्वनि स्तर को लेकर दिशा-निर्देश साझा किए। बातचीत के बाद मस्जिद के ऊँचे स्पीकर को पुलिस की मौजूदगी में उतार लिया गया। इसके बाद टीम मलका जमानी मस्जिद पहुंची, जहाँ लाउडस्पीकरों का एक और सेट हटाया गया।

इसी क्रम में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बटुक भैरव मंदिर में भी कार्रवाई की। मंदिर के पुजारी से बातचीत के बाद उन्हें ध्वनि नियंत्रण से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई और वहां लगाए गए अतिरिक्त स्पीकरों को हटाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से शांति और आपसी सहमति से की जा रही है ताकि किसी प्रकार का धार्मिक विवाद या तनाव उत्पन्न न हो।

वजीरगंज थाना प्रभारी ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण और विनियमन) नियम 2000 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल पर बिना अनुमति के लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम का उपयोग अवैध है। यह नियम रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है। साथ ही, दिन में भी निर्धारित सीमा से अधिक डेसिबल की आवाज़ पर कार्यवाही की जा सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही सामुदायिक केंद्रों, बारात घरों और सार्वजनिक स्थलों पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश में “शांति, सौहार्द और कानून व्यवस्था” बनाए रखना प्राथमिकता है।

स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि तेज लाउडस्पीकरों से क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, जिससे छात्रों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी होती है। वहीं, कई धार्मिक नेताओं ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया और कहा कि धर्म का उद्देश्य अनुशासन और शांति का संदेश देना है, न कि असुविधा पैदा करना।

अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में जिले के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। शासन ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि ध्वनि नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और किसी भी प्रकार की अवैध स्थापना पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

लखनऊ प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल शहर में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण होगा बल्कि धार्मिक स्थलों के बीच आपसी सद्भाव और सहयोग की मिसाल भी स्थापित होगी।

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