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फ्रीबीज कल्चर पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, CJI की बेंच ने पूछा – “हम किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं?”

नई दिल्ली: देश में बढ़ते ‘फ्रीबीज कल्चर’ यानी मुफ्त योजनाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। Supreme Court of India की बेंच ने सवाल उठाया कि आखिर हम देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं और “हम भारत में किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं?”

यह टिप्पणी तमिलनाडु में सभी उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने के प्रस्ताव से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई।

⚖️ CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने राज्यों की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताई।

CJI ने पूछा:

“राज्य राजस्व घाटे में हैं, फिर भी फ्रीबीज क्यों बांटे जा रहे हैं? इसका भुगतान आखिर कौन करेगा – टैक्सपेयर नहीं तो कौन?”

💡 मुफ्त बिजली पर सवाल

मामला Tamil Nadu Power Distribution Corporation Limited से जुड़ा है, जिसमें सभी वर्गों को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिजली का बिल देने में सक्षम है, तो उसे भी मुफ्त सुविधा देना क्या उचित है?

📉 विकास बनाम फ्रीबीज

बेंच ने कहा कि:

  • अधिकांश राज्य राजस्व घाटे में चल रहे हैं
  • योजनागत विकास पर खर्च कम हो रहा है
  • बजट का बड़ा हिस्सा वेतन और मुफ्त योजनाओं में जा रहा है

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि लगभग सभी राज्यों की है।

🧑‍💼 रोजगार सृजन पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि:

  • फ्रीबीज की बजाय रोजगार सृजन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए
  • योजनाओं के लिए स्पष्ट बजट आउटले तय हो
  • जरूरतमंद और सक्षम लोगों में फर्क किया जाए

CJI ने मौखिक टिप्पणी में कहा:

“कल्याणकारी योजनाएं जरूरी हैं, लेकिन बिना यह देखे कि कौन दे सकता है और कौन नहीं, बांटना क्या सही नीति है?”

🔍 क्या बदलेगा फ्रीबीज मॉडल?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से संकेत मिल रहे हैं कि भविष्य में मुफ्त योजनाओं की समीक्षा और सख्त मापदंड तय हो सकते हैं।

राजनीतिक दलों के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि कल्याणकारी योजनाएं आर्थिक संतुलन के साथ ही लागू की जाएं।

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