मुरादाबाद: वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता का असर अब उत्तर प्रदेश के प्रमुख निर्यात केंद्र मुरादाबाद पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी आयात शुल्क (टैरिफ) में बढ़ोतरी से यहां का लगभग 5000 करोड़ रुपये का पीतल और हस्तशिल्प निर्यात उद्योग दबाव में आ गया है।
मुरादाबाद का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहा है। लेकिन हालिया टैरिफ वृद्धि के कारण अमेरिकी खरीदारों ने नए ऑर्डर कम कर दिए हैं या टाल दिए हैं। इससे उत्पादन इकाइयों पर दबाव बढ़ा है और नकदी प्रवाह प्रभावित हुआ है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ बढ़ने से भारतीय मेटल और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो गए हैं। ऐसे में खरीदार वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
हालांकि अमेरिका द्वारा कुछ श्रेणियों में 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने की खबर से आंशिक राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन मेटल उत्पादों पर लागू उच्च शुल्क अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।
छोटे और मध्यम निर्यातक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई इकाइयों ने उत्पादन घटाया है, ओवरटाइम कम किया गया है और कुछ जगह अस्थायी छंटनी भी हुई है।
निर्यातकों ने केंद्र सरकार से व्यापार वार्ता में राहत दिलाने और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए बाजारों की तलाश, डिज़ाइन नवाचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।
फिलहाल पीतल नगरी के उद्योग और कारीगरों की नजरें वैश्विक व्यापार नीति के अगले फैसलों पर टिकी हैं।