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मुरादाबाद में बुलडोजर एक्शन पर BJP महापौर ने उठाए सवाल, अफसरों पर जताया अविश्वास!

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई के बीच अब सत्ताधारी दल के ही एक नेता ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुरादाबाद के भाजपा महापौर विनोद अग्रवाल ने हाईवे किनारे हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों पर अविश्वास जताया है और इस पूरे मामले की शिकायत शासन तक पहुंचा दी है।

दरअसल, तीन दिन पहले जिला प्रशासन ने नेशनल हाईवे बाईपास के पास धीमरी गांव में करीब 20 बीघा जमीन पर बनी बाउंड्री को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का दावा है कि यह जमीन सरकारी है और यहां ‘मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ बनाया जाना है।

लेकिन महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि इस जमीन में से करीब 10 बीघा भूमि उनकी निजी संपत्ति है, जिसे गलत तरीके से ध्वस्त किया गया है।

क्या है पूरा मामला

12 मार्च को सदर तहसील प्रशासन की टीम ने धीमरी गांव के पास स्थित करीब 5 एकड़ भूमि को कब्जामुक्त कराया। प्रशासन के मुताबिक यह जमीन सरकार द्वारा प्रस्तावित मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल के लिए आरक्षित की गई है।

इस प्रोजेक्ट के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को दी गई है। जब प्रोजेक्ट की टीम मौके पर पहुंची तो जमीन पर पहले से बनी बाउंड्री मिली। इसके बाद प्रशासन ने पैमाइश कराते हुए बुलडोजर चलाकर बाउंड्री को गिरा दिया।

भाजपा महापौर की बाउंड्री भी हुई ध्वस्त

बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर बुलडोजर चला, उसमें भाजपा महापौर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता ऋषिपाल चौधरी के भाई अमित चौधरी की बाउंड्री भी शामिल थी।

बाउंड्री गिरने के बाद शहर की सियासत गर्म हो गई और महापौर ने अधिकारियों से कड़ी आपत्ति जताते हुए मुआवजे की मांग की।

शासन को लिखी चिट्ठी

जब स्थानीय स्तर पर मामला हल नहीं हुआ तो महापौर ने प्रदेश के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर को पत्र भेजकर कार्रवाई पर सवाल उठाए।

उन्होंने अपने पत्र में कहा कि उनके खिलाफ हुई बुलडोजर कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

दोबारा हो रही जमीन की पैमाइश

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने जमीन की दोबारा पैमाइश कराने का फैसला लिया है।

13 मार्च को डीएम अनुज सिंह खुद एसडीएम और राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जमीन की नापजोख शुरू कराई। पिछले तीन दिनों से प्रशासनिक और निजी टीमें जमीन की सीमा तय करने में जुटी हुई हैं।

सियासी हलकों में चर्चा तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुरादाबाद में प्रशासन और भाजपा के ही एक बड़े नेता के बीच टकराव की चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जमीन सरकारी साबित होती है या महापौर का दावा सही निकलता है।

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