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ईरान ने ठुकराई अमेरिका की शर्तें, सीजफायर वार्ता पर लगा ब्रेक!

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर वार्ता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने अमेरिकी शर्तों को खारिज करते हुए प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। इससे क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

वार्ता से पीछे हटा ईरान

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने मध्यस्थ देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आगामी दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तें “अस्वीकार्य” और “एकतरफा” हैं।
ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने कहा कि कोई सीधी बातचीत नहीं हुई, बल्कि तीसरे पक्ष के जरिए “गलत और अत्यधिक” मांगें भेजी गई हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर असर

इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका भी कमजोर पड़ती दिख रही है। पाकिस्तान ने पहले अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की थी।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि उनका देश इस वार्ता को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। लेकिन ईरान के इनकार के बाद यह पहल फिलहाल ठंडी पड़ गई है।

अमेरिका का रुख

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ बातचीत में “अच्छी प्रगति” हो रही है। हालांकि उन्होंने इस पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की।
ईरान के ताजा बयान के बाद ट्रंप के इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

15 पॉइंट प्रस्ताव बना विवाद की जड़

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को 15 पॉइंट का प्रस्ताव भेजा था। ईरान ने इसे “अवास्तविक और बेकार” बताते हुए खारिज कर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को और बढ़ा सकता है।

क्या खत्म नहीं होगी जंग?

ईरान ने यह भी कहा कि युद्ध का अंत होना जरूरी है, लेकिन यह भी समझना होगा कि इसकी शुरुआत किसने की। इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी कम होने वाला नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है और इसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता का रुकना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए बड़ा झटका है। पाकिस्तान जैसे देशों की कोशिशें भी फिलहाल असफल होती दिख रही हैं। ऐसे में दुनिया की नजर अब इस पर टिकी है कि क्या दोनों देश किसी नए रास्ते पर सहमत हो पाएंगे या फिर यह तनाव और बढ़ेगा।

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