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ईरान का पलटवार: अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला, मध्य पूर्व में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा!

➤ अमेरिका-ईरान तनाव ने लिया खतरनाक मोड़

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान के रणनीतिक शहर बंदर अब्बास के पास सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला कर दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर हमला किया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हमला किस अमेरिकी बेस पर हुआ, लेकिन इस कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

➤ सुबह 4:50 बजे हुआ हमला, ईरान ने दी खुली चेतावनी

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय समयानुसार सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया गया। IRGC ने कहा कि यह हमला अमेरिका द्वारा बंदर अब्बास क्षेत्र में किए गए एयर स्ट्राइक का जवाब है। ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई और हमला हुआ तो उसकी प्रतिक्रिया और ज्यादा कठोर और निर्णायक होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल सैन्य जवाब नहीं बल्कि अमेरिका को रणनीतिक संदेश देने की कोशिश भी है कि ईरान अब सीधे जवाब देने की नीति अपना रहा है।

➤ अमेरिका ने पहले बंदर अब्बास में की थी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने सोमवार को दावा किया था कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास सक्रिय ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन सिस्टम को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के अनुसार चार ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया जबकि पांचवें ड्रोन के लॉन्च कंट्रोल स्टेशन को भी नष्ट कर दिया गया।

हमले के बाद बंदर अब्बास के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनाई दी थीं। हालांकि उस समय ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उसने साफ कहा था कि वह इस कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन मानता है और चुप नहीं बैठेगा।

➤ क्यों इतना अहम है बंदर अब्बास?

बंदर अब्बास ईरान का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री और व्यापारिक केंद्र माना जाता है। यह शहर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। इसी वजह से यह इलाका वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है।

यहां मौजूद शाहिद राजाई पोर्ट ईरान का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट है। इसके अलावा ईरानी नौसेना और रिवॉल्यूशनरी गार्ड की समुद्री इकाइयों का बड़ा बेस भी यहीं स्थित है। किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

➤ तेल बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।

फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि क्षेत्र में बड़े युद्ध की स्थिति पैदा न हो।

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