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TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! बैठक में नहीं पहुंचे अधिकांश विधायक, इस्तीफों से बढ़ी ममता बनर्जी की मुश्किलें!

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress में चुनावी झटके के बाद अंदरूनी असंतोष के संकेत दिखाई देने लगे हैं। पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee द्वारा बुलाई गई नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में अपेक्षित संख्या में विधायक नहीं पहुंचे, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

बताया जा रहा है कि बैठक में 80 में से केवल करीब 20 विधायक ही उपस्थित हुए, जबकि बड़ी संख्या में विधायक अनुपस्थित रहे। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्यों चर्चा में आई विधायक बैठक?

रविवार को आयोजित होने वाली इस बैठक का उद्देश्य चुनावी परिणामों की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करना था। लेकिन अधिकांश विधायकों की गैरमौजूदगी के कारण बैठक प्रभावी रूप से नहीं हो सकी।

पार्टी नेताओं का कहना है कि कई विधायक जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन और संगठनात्मक गतिविधियों में व्यस्त थे। वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी हार के बाद बढ़ती नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं।

पार्टी छोड़ रहे नेता और पार्षद

चुनावी नतीजों के बाद पार्टी में इस्तीफों का सिलसिला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई प्रवक्ताओं और संगठनात्मक पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है।

इसके अलावा विभिन्न नगर निकायों में बड़ी संख्या में पार्षदों द्वारा इस्तीफे दिए जाने की खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा है कि 100 से अधिक पार्षद पार्टी से दूरी बना चुके हैं।

TMC का क्या कहना है?

पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनका दावा है कि हाल की घटनाओं और राजनीतिक तनाव के कारण कई विधायक बैठक में शामिल नहीं हो सके।

टीएमसी नेताओं के अनुसार यह कोई संगठनात्मक संकट नहीं बल्कि अस्थायी राजनीतिक परिस्थिति का परिणाम है।

विपक्ष ने साधा निशाना

विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर टीएमसी पर हमला बोला है। विपक्ष का दावा है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

हालांकि टीएमसी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी एकजुट है और संगठन मजबूत बना हुआ है।

क्या TMC के लिए बढ़ रही है चुनौती?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर असंतोष उभरना असामान्य नहीं होता। लेकिन यदि इस्तीफों और असंतोष का सिलसिला लंबे समय तक जारी रहता है तो यह पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को कैसे साधते हैं और संगठन को दोबारा मजबूती देने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा असर?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी एक प्रमुख ताकत रही है। ऐसे में पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की उथल-पुथल का असर राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।

आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व के फैसले यह तय करेंगे कि मौजूदा संकट केवल अस्थायी है या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत।

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