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महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ से सियासी हलचल, उद्धव ठाकरे की शिवसेना में टूट की अटकलें तेज!

दिल्ली में जुटे बागी सांसद, बढ़ी उद्धव गुट की चिंता

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के दिल्ली पहुंचने के बाद पार्टी में टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक पार्टी के 9 सांसदों में से 6 सांसद राजधानी दिल्ली में मौजूद हैं और उनके एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं से संपर्क में होने की चर्चा है।

प्रियंका चतुर्वेदी का बीजेपी पर हमला

शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी को चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि सांपों को दूध पिलाने वाले यह न समझें कि वे केवल विपक्ष को ही नुकसान पहुंचाएंगे। प्रियंका ने कहा कि “सांप की फितरत ही डंसना है”, जिससे साफ संकेत मिला कि पार्टी नेतृत्व बगावत की खबरों को गंभीरता से ले रहा है।

स्पीकर को लिखा गया पत्र

उधर बागी गतिविधियों की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पार्टी के किसी भी सांसद द्वारा अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में विलय को मान्यता न दी जाए। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) ही मूल राजनीतिक दल है और सांसद उसी के आधार पर संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं।

संजय राउत के घर हुई अहम बैठक

दिल्ली में जारी राजनीतिक हलचल के बीच सांसद संजय राउत के निवास पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हुए। इसी दौरान पार्टी ने 18 जून को होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए सभी सांसदों को व्हिप भी जारी कर दिया है।

19 जून पर टिकी सबकी निगाहें

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि 19 जून को शिवसेना स्थापना दिवस के मौके पर बड़ा ऐलान हो सकता है। माना जा रहा है कि इसी दिन बागी सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि अभी तक किसी भी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की पुष्टि नहीं की है।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ा सस्पेंस

साल 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना में बड़ी टूट देखने को मिली थी। अब एक बार फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रखने में सफल होते हैं या फिर उन्हें एक और बड़ा राजनीतिक झटका झेलना पड़ेगा।

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