अंतरराष्ट्रीय बाजार से आई राहत भरी खबर
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद क्रूड ऑयल की कीमत गिरकर 77.51 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है। यह पिछले साढ़े तीन महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इस गिरावट ने भारत समेत दुनिया भर के तेल आयातक देशों को बड़ी राहत दी है।
युद्ध खत्म होने से बढ़ी सप्लाई की उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व में तनाव कम होना है। मार्च 2026 में जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष चरम पर था, तब ब्रेंट क्रूड 138 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। वहीं अमेरिकी क्रूड ऑयल (WTI) भी 114 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था। अब शांति समझौते के बाद तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
19 जून को समझौते पर होंगे आधिकारिक हस्ताक्षर
जानकारी के मुताबिक 19 जून को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि समझौते के बाद वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आएगी और कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?
पिछले चार महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी। तेल कंपनियों को भी भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा था। अब कच्चे तेल के सस्ता होने से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
तेल कंपनियों का घाटा घटने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, ऊंची कीमतों के दौर में सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ा था। एलपीजी सिलेंडर पर भी कंपनियों को बड़ा घाटा झेलना पड़ा। लेकिन अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद कंपनियों की लागत कम होने लगी है, जिससे वित्तीय स्थिति में सुधार की संभावना है।
क्या जल्द सस्ता होगा पेट्रोल और LPG?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम जनता को जल्द राहत मिलेगी? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की जा सकती है। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकार की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
आम लोगों को मिल सकती है महंगाई से राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहती। इससे परिवहन लागत कम होती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और अन्य सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि यह गिरावट जारी रहती है तो आम लोगों को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है।