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US-ईरान समझौते से कच्चे तेल में गिरावट, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर!

भारत समेत दुनिया भर के उपभोक्ताओं की नजरें इन दिनों पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर टिकी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि 18 जून 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

US-ईरान डील के बाद क्रूड ऑयल हुआ सस्ता

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत गिरकर 77 से 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 75 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखी जा सकती है।

आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

तेल विपणन कंपनियों ने 18 जून को पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है।

प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम इस प्रकार हैं—

  • दिल्ली : पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर, डीजल ₹95.20 प्रति लीटर
  • मुंबई : पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर, डीजल ₹97.83 प्रति लीटर
  • कोलकाता : पेट्रोल ₹113.47 प्रति लीटर, डीजल ₹99.82 प्रति लीटर
  • चेन्नई : पेट्रोल ₹107.88 प्रति लीटर, डीजल ₹99.65 प्रति लीटर

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद तेल कंपनियां अभी अपने पुराने घाटे की भरपाई करने में जुटी हैं, इसलिए तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है।

क्या आने वाले दिनों में सस्ता होगा पेट्रोल?

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड लगातार 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहता है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की कमी संभव है। हालांकि केंद्र सरकार की कर नीति, राज्यों का वैट और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करेगी। इसलिए उपभोक्ताओं को फिलहाल थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।

क्यों अलग-अलग शहरों में अलग होते हैं दाम?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर दिन अपडेट होती हैं, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट, परिवहन खर्च और स्थानीय करों के कारण अलग-अलग शहरों में इनके दाम भिन्न होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और तेल आपूर्ति सामान्य होती है, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

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