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रांची में 23वें दिन भी जारी छात्र आंदोलन, राहुल गांधी पर वादाखिलाफी का आरोप; 20 अगस्त को सीएम आवास घेराव का ऐलान!

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अपनी मांगों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्रों का आंदोलन अब 23वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

छात्रों ने अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने राहुल गांधी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों से बातचीत तो की, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।

राहुल गांधी से छात्रों ने की समर्थन वापस लेने की मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यदि राहुल गांधी वास्तव में उनके साथ हैं तो उन्हें छात्र आंदोलन के बीच आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों को नहीं मान रही है तो कांग्रेस को सरकार से अपना समर्थन वापस लेना चाहिए।

छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आंदोलन के मौजूदा स्वरूप को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अभी तक आंदोलन गांधीवादी तरीके से चलाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन का स्वरूप बदल सकता है।

16 अगस्त को पुतला दहन, 20 अगस्त को घेराव का ऐलान

प्रदर्शनकारी छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के पुतले फूंकने का ऐलान किया है। इसके अलावा 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की बात कही गई है। छात्रों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

इस घटनाक्रम के बाद झारखंड की राजनीति में भी छात्र आंदोलन को लेकर हलचल बढ़ सकती है। हालांकि, छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित राजनीतिक पक्षों का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

झारखंड सरकार में कांग्रेस की स्थिति

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और सीपीआई (एमएल) के 2 विधायक बताए गए हैं।

छात्रों का कहना है कि कांग्रेस के पास सरकार पर दबाव बनाने की राजनीतिक क्षमता है और उसे इसका इस्तेमाल उनकी मांगों के समाधान के लिए करना चाहिए।

समर्थन वापस लेने पर क्या होगा?

यदि कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेती है तो मौजूदा गठबंधन का संख्याबल बहुमत के आंकड़े से नीचे जा सकता है। हालांकि, इसके बाद भी सरकार के सामने दूसरे राजनीतिक विकल्प मौजूद हो सकते हैं। विधानसभा में अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है और 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव पर सबकी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और कांग्रेस इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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