अन्तर्राष्ट्रीय

ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, भारतीयों के ग्रीन कार्ड सपने को झटका? 12 लाख लोग हो सकते हैं प्रभावित

वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क डेस्क

अमेरिका में नौकरी और स्थायी निवास का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। United States Citizenship and Immigration Services से जुड़े नए नियमों के बाद अब अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करना आसान नहीं रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव करते हुए संकेत दिया है कि कई गैर-नागरिकों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के लिए अपने देश लौटना पड़ सकता है।

इस फैसले का असर खासतौर पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स और अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोगों पर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 12 लाख ग्रीन कार्ड आवेदन पहले से लंबित हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है।

क्या बदला है नए नियम में?

अब तक अमेरिका में मौजूद लोग “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के जरिए वहीं रहकर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन और इंतजार कर सकते थे। इसमें अमेरिकी नागरिकों के परिवार, स्टूडेंट वीजा होल्डर और वर्क वीजा पर आए लोग शामिल थे।

लेकिन नए बदलाव के बाद ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अस्थायी वीजा पर अमेरिका आने वालों को स्थायी निवास पाने के लिए अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

USCIS के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका अब “इमिग्रेशन कानून की मूल भावना” पर लौट रहा है और अस्थायी वीजा को ग्रीन कार्ड पाने का शॉर्टकट नहीं बनने दिया जाएगा।

भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर क्यों?

अमेरिका में भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में H-1B वर्क वीजा और स्टूडेंट वीजा पर मौजूद है। इनमें हजारों टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट, इंजीनियर, रिसर्चर और मेडिकल प्रोफेशनल्स शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम पूरी तरह लागू होता है, तो कई लोगों को अमेरिका छोड़कर भारत वापस लौटना पड़ सकता है और फिर लंबी वीजा प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे नौकरी, परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है।

ट्रंप प्रशासन क्या कह रहा?

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह फैसला इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा “निष्पक्ष और कुशल” बनाएगा। प्रशासन का कहना है कि कई लोग टूरिस्ट, स्टूडेंट या अस्थायी वर्क वीजा लेकर अमेरिका आते हैं और बाद में उसी के जरिए स्थायी निवास पाने की कोशिश करते हैं।

सरकार इसे “लूपहोल” बंद करने की कार्रवाई बता रही है।

आलोचकों ने उठाए सवाल

डेमोक्रेट नेताओं और इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका की टेक इंडस्ट्री और रिसर्च सेक्टर को बड़ा नुकसान हो सकता है।

आलोचकों का कहना है कि वैज्ञानिक, इंजीनियर और स्किल्ड प्रोफेशनल अब कनाडा, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख कर सकते हैं। इससे अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।

साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में फंसे लोगों को अब डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ेगा। हालांकि इस पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

भारतीय समुदाय में बढ़ी चिंता

इस फैसले के बाद अमेरिका में रह रहे भारतीयों के बीच चिंता का माहौल है। कई लोग वर्षों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्हें अपनी नौकरी, भविष्य और परिवार को लेकर नई अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नीति को लेकर कानूनी चुनौती भी देखने को मिल सकती है।

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