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US-ईरान शांति समझौता: जंग खत्म, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुला, 14 बिंदुओं पर बनी सहमति!

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने 14 बिंदुओं वाले एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य युद्धविराम लागू करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू करना है।

ट्रंप और पेजेशकियन ने वर्चुअली किए हस्ताक्षर

जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअल माध्यम से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस दस्तावेज को “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” नाम दिया गया है। समझौते के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा, वैश्विक व्यापार को मिलेगी राहत

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। समझौते के तहत ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की गारंटी दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता आएगी और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा संकट कम हो सकता है।

14 बिंदुओं में क्या-क्या बनी सहमति?

दोनों देशों के बीच हुए समझौते में कई अहम प्रावधान शामिल हैं।

  • तत्काल युद्ध और फायरिंग बंद होगी।
  • एक-दूसरे के खिलाफ हमला या धमकी नहीं दी जाएगी।
  • दोनों देश संप्रभुता और सीमाओं का सम्मान करेंगे।
  • 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए वार्ता पूरी की जाएगी।
  • अमेरिका 30 दिनों में नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करेगा।
  • अमेरिकी सेना की वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करेगा।
  • अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक योजना तैयार करेगा।
  • ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
  • ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
  • दोनों देश मौजूदा स्थिति को बनाए रखेंगे।
  • तेल निर्यात और बैंकिंग सेक्टर में ईरान को राहत मिलेगी।
  • ईरान की फंसी हुई संपत्तियों को जारी किया जाएगा।
  • समझौते की निगरानी अंतरराष्ट्रीय तंत्र करेगा और अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने का प्रयास होगा।

ईरान ने समझौते का किया स्वागत

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि कई महीनों से विभिन्न देशों की मध्यस्थता में बातचीत चल रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्रीय तनाव को कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

वैश्विक राजनीति पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ सकती है। साथ ही तेल की कीमतों में नरमी आने और वैश्विक व्यापार को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

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