राष्ट्रीय

साइबर अपराधियों पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी, बोले- ‘परजीवी हैं, जेल में रहना ही बेहतर’!

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आई कड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में साइबर अपराध से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने साइबर अपराधियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया और जमानत देने से इनकार कर दिया।

‘परजीवी हैं साइबर अपराधी’

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साइबर अपराधी समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे लोग निवेशकों और आम नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी करते हैं तथा विभिन्न राज्यों में अपराध कर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।

जमानत याचिका हुई खारिज

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साइबर ठगी जैसे अपराधों का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इन अपराधियों को पकड़ना भी आसान नहीं होता। ऐसे में समाज के हित को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

साइबर अपराध पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की। अदालत का कहना था कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन ठगी, निवेश धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं।

पहले भी बयान को लेकर हुई थी चर्चा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत इससे पहले भी अपनी एक टिप्पणी को लेकर चर्चा में रहे थे। उस समय उनके कथित ‘कॉकरोच’ संबंधी बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई थी। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणी का संदर्भ कुछ और था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

न्यायपालिका का सख्त संदेश

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी साइबर अपराध के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराधों में बढ़ोतरी के चलते न्यायपालिका भी ऐसे मामलों में कठोर रुख अपनाती दिखाई दे रही है।

साइबर सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती

भारत में डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। ऐसे में अदालतों और जांच एजेंसियों द्वारा लगातार सख्ती बरतने पर जोर दिया जा रहा है ताकि आम नागरिकों को साइबर अपराधियों से बचाया जा सके।

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