देश की राजनीति में परिसीमन विधेयक एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में बढ़ती अंदरूनी खींचतान और कुछ पार्टियों में संभावित टूट की खबरों ने केंद्र की मोदी सरकार की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी मानसून सत्र में सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा संसद में ला सकती है।
हालांकि सरकार की स्थिति पहले से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन अभी भी दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा पूरी तरह उसके पक्ष में नहीं है।
अप्रैल में 54 वोटों से गिर गया था परिसीमन बिल
अप्रैल 2026 में महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में सीट आरक्षण से जुड़े परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया था। लेकिन आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक 54 मतों से पारित नहीं हो सका। उस समय लोकसभा की 543 सीटों में से तीन सीटें रिक्त थीं। मतदान के दौरान 12 सांसद अनुपस्थित रहे और केवल 528 सांसदों ने वोट डाला था। इस आधार पर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 352 सदस्यों तक सीमित हो गया था।
मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया था।
TMC और शिवसेना (UBT) से मिला अतिरिक्त समर्थन
राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद अब सत्ता पक्ष को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के समर्थन से एनडीए को कुल 26 अतिरिक्त सांसदों का साथ मिल सकता है। इसके बावजूद अप्रैल के मतदान के आधार पर देखें तो सरकार अभी भी दो-तिहाई बहुमत के लिए 28 सांसद पीछे है।
क्या DMK बदल सकती है पूरा गणित?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके परिसीमन बिल पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि डीएमके इस विधेयक के समर्थन में आती है तो उसके 22 सांसदों का समर्थन मिलने से लोकसभा में सरकार की कमी घटकर केवल 6 सांसदों तक रह जाएगी।
हालांकि डीएमके की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राज्यसभा में भी बढ़ सकता है NDA का आंकड़ा
राज्यसभा में फिलहाल कुल 245 सदस्य हैं और दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे के बाद यह आंकड़ा घटकर 162 हो गया है। वर्तमान में एनडीए के पास 150 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है।
यदि डीएमके के 8 राज्यसभा सांसद भी सरकार के साथ आते हैं तो यह संख्या बढ़कर 158 तक पहुंच सकती है। ऐसे में सरकार को केवल चार और सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
क्या मानसून सत्र में फिर आएगा परिसीमन विधेयक?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों में बढ़ती असहमति और संभावित राजनीतिक पुनर्संरचना के बीच सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने की रणनीति बना सकती है। हालांकि यह पूरा गणित अभी संभावनाओं और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है। अंतिम तस्वीर संसद में दलों के वास्तविक रुख के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।