मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump प्रशासन एक बड़े सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, United States ईरान में मौजूद लगभग 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम को कब्जे में लेने की योजना बना रहा है। आशंका है कि इस यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।
क्यों अहम है 400 किलो यूरेनियम
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम किसी भी देश के लिए परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। यही कारण है कि United States इस सामग्री को सुरक्षित करना चाहता है, ताकि संभावित खतरे को रोका जा सके।
आसान नहीं होगा ग्राउंड ऑपरेशन
हालांकि, यह मिशन बेहद जटिल और जोखिम भरा माना जा रहा है। Iran के भीतर घुसकर परमाणु साइट तक पहुंचना और वहां से यूरेनियम को सुरक्षित बाहर निकालना किसी बड़ी सैन्य चुनौती से कम नहीं है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऑपरेशन में विशेष बलों की जरूरत होगी, जो मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच साइट को सुरक्षित करेंगे। इसके अलावा, वहां मौजूद माइंस और संभावित जाल (booby traps) को भी निष्क्रिय करना होगा।
ईरान की चेतावनी और बढ़ता खतरा
Iran पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसकी जमीन पर कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो वह कड़ा जवाब देगा। ऐसे में यह ऑपरेशन पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का कारण बन सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना की 31st Marine Expeditionary Unit पहले ही मिडिल ईस्ट में तैनात की जा चुकी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि तैयारी तेज हो चुकी है।
तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियां
यूरेनियम को सुरक्षित निकालना सिर्फ सैन्य ही नहीं, बल्कि तकनीकी चुनौती भी है। यह सामग्री विशेष सिलेंडरों में रखी जाती है, जिन्हें सुरक्षित तरीके से ट्रांसपोर्ट करना जरूरी होता है।
इसके लिए विशेष कंटेनर, ट्रकों का काफिला और संभवतः अस्थायी हवाई पट्टी की भी जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरा ऑपरेशन कई दिनों या एक सप्ताह तक चल सकता है।
क्या बढ़ेगा युद्ध का दायरा?
अगर यह ऑपरेशन शुरू होता है, तो मिडिल ईस्ट में पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। United States और Iran के बीच सीधा टकराव वैश्विक स्तर पर बड़ा संकट पैदा कर सकता है।
दुनिया की नजरें इस फैसले पर
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि Donald Trump इस ऑपरेशन को मंजूरी देते हैं या नहीं। यह फैसला न सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक सुरक्षा और राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है।