देश की राजधानी Delhi को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार ने नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया है। Delhi Government की इस नई EV नीति में जहां इलेक्ट्रिक वाहनों पर भारी सब्सिडी दी जाएगी, वहीं पेट्रोल, डीजल और CNG वाहनों पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई गई है।
क्या है नई EV पॉलिसी?
नई पॉलिसी के तहत राजधानी को “EV कैपिटल” बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आने वाले वर्षों में पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाएगी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
2027 से थ्री-व्हीलर पर रोक
नई नीति के अनुसार, साल 2027 से Delhi में पेट्रोल, डीजल और CNG से चलने वाले थ्री-व्हीलर्स (टेंपो/ऑटो) का नया रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसके बाद केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स को ही अनुमति मिलेगी।
2028 से पेट्रोल बाइक का रजिस्ट्रेशन बंद
इसके अलावा 2028 से पेट्रोल और डीजल से चलने वाली बाइक्स का रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया जाएगा। यानी भविष्य में केवल ई-बाइक और इलेक्ट्रिक स्कूटर ही सड़कों पर नजर आएंगे।
स्कूल बसों के लिए क्या नियम?
नई पॉलिसी में स्कूलों के लिए भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।
2030 तक सभी स्कूलों को अपने कुल बस बेड़े का कम से कम 30% हिस्सा इलेक्ट्रिक बसों में बदलना होगा। इससे बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।
सरकारी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बदलाव
Delhi Government ने फैसला किया है कि अब सरकारी विभागों में कोई भी नई पेट्रोल या डीजल गाड़ी नहीं खरीदी जाएगी। धीरे-धीरे पूरा सरकारी बेड़ा इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। इसी तरह पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी इलेक्ट्रिक मोड में शिफ्ट किया जाएगा।
EV खरीदने पर मिलेगी भारी सब्सिडी
सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है:
- ई-बाइक: 2.5 लाख तक की खरीद पर 30,000 रुपये तक सब्सिडी
- ई-कार: पहली 10,000 गाड़ियों पर 50,000 रुपये की सब्सिडी
- हाइब्रिड वाहन: 30 लाख से कम कीमत पर रजिस्ट्रेशन फीस में छूट
क्यों जरूरी है यह पॉलिसी?
विशेषज्ञों के अनुसार, Delhi में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन हैं। इस नीति का उद्देश्य न केवल प्रदूषण कम करना है, बल्कि शहर को देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन हब बनाना भी है।
निष्कर्ष
नई EV पॉलिसी लागू होने के बाद राजधानी में ट्रांसपोर्ट का पूरा स्वरूप बदल सकता है। जहां एक ओर लोगों को सस्ती और पर्यावरण-friendly सवारी मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों का दौर धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।