महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के लागू होते ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस कानून पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो Mayawati ने कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस, बीजेपी और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस पर ‘गिरगिट’ वाला बयान क्यों?
मायावती ने कांग्रेस को “गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी” बताते हुए कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने SC, ST और OBC वर्ग के आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की गंभीर कोशिश नहीं की। अब महिला आरक्षण के मुद्दे पर इन वर्गों की बात करना केवल राजनीतिक स्वार्थ है। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों के तहत OBC को 27% आरक्षण देने का श्रेय भी कांग्रेस को नहीं, बल्कि अन्य प्रयासों को जाता है।
सपा पर भी साधा निशाना
मायावती ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि सपा सरकार ने पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने वाली 1994 की रिपोर्ट को लागू नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार बनने के बाद ही इसे लागू किया गया। उनका आरोप है कि सपा सत्ता में रहते हुए अलग नीति अपनाती है और विपक्ष में रहते हुए अलग बयान देती है।
महिला आरक्षण पर क्या है मायावती की सलाह?
मायावती ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को लेकर SC, ST, OBC और मुस्लिम समाज को फिलहाल जो मिल रहा है, उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इन वर्गों के हितों का और बेहतर ध्यान रखा जा सकता है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी पार्टी के बहकावे में आने के बजाय समाज को आत्मनिर्भर बनना होगा और अपने अधिकारों के लिए खुद खड़ा होना होगा।
चुनावी राजनीति में बढ़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण कानून और इस पर मायावती का बयान आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। इससे खासकर दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ने की संभावना है।