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लखनऊ मेयर पर अखिलेश यादव का तंज, बोले — “महापौर का सदा महादौर नहीं होता”!

Akhilesh Yadav ने लखनऊ की मेयर Sushma Kharkwal पर बड़ा हमला बोला है। मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज होने के बाद सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा — “महापौर का सदा महादौर नहीं होता… न्याय हुआ।”

इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। यह कार्रवाई अदालत के आदेश का पालन न करने के मामले में की गई।

मामला वार्ड-73 फैजुल्लागंज से जुड़े पार्षद चुनाव से संबंधित बताया जा रहा है। चुनाव न्यायाधिकरण ने दिसंबर 2025 में ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित किया था। लेकिन आरोप है कि करीब पांच महीने तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई।

इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने शपथ दिलाने का निर्देश दिया था। हालांकि आदेश का पालन न होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

पुराने विवाद से भी जुड़ा मामला

राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को पुराने विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि मेयर सुषमा खर्कवाल ने पहले अखिलेश यादव की मां को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था।

अब हाई कोर्ट की कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव का बयान तेजी से वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस छिड़ गई है।

भाजपा सरकार पर भी साधा निशाना

इस मुद्दे के साथ-साथ Akhilesh Yadav ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।

सपा प्रमुख ने ‘पीडीए ऑडिट’ दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और समानता के लिए आरक्षण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में “पीडीए की सरकार” बनेगी।

बुलडोजर राजनीति पर बयान

अखिलेश यादव ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है तो उसे असमानता खत्म करने और लोगों को उनका उचित अधिकार दिलाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला यूपी की राजनीति में और गर्मा सकता है।

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