इस खबर का मुख्य मुद्दा है कि जापान अपनी लंबी दूरी की टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल और छोटे हमलावर ड्रोन के प्रशिक्षण के लिए भारत के मिसाइल परीक्षण केंद्रों का इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाश रहा है। जापानी अधिकारियों ने भारत में संभावित प्रशिक्षण स्थलों का जायजा लिया है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते या परीक्षण की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। The Diplomat+1
जापान भारत में करेगा मिसाइलों का परीक्षण? टाइप-25 और अटैक ड्रोन पर बड़ी चर्चा
जापान अपनी आधुनिक सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारत के मिसाइल परीक्षण केंद्रों और सैन्य प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग करने की संभावनाएं तलाश रहा है। जापानी ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (GSDF) के अधिकारी भारत में संभावित परीक्षण स्थलों का निरीक्षण कर चुके हैं। इस पहल में लंबी दूरी की टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल और छोटे हमलावर ड्रोन से जुड़े प्रशिक्षण की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। The Japan Times+1
टाइप-25 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 1,000 किलोमीटर
जापान की टाइप-25 सतह से समुद्र में लक्ष्य को निशाना बनाने वाली निर्देशित मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर बताई जा रही है। इतनी लंबी दूरी की मिसाइलों का सुरक्षित प्रशिक्षण करना जापान के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए बड़े परीक्षण क्षेत्र, पर्याप्त समुद्री दूरी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है।
जापानी ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के प्रमुख जनरल मसायोशी अराई ने 27 अक्टूबर 2026 को पत्रकारों से बातचीत में पुष्टि की कि भारत के साथ विभिन्न विषयों पर समन्वय के लिए अधिकारी भेजे गए थे। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी की मिसाइलों की क्षमता का पूरा उपयोग करने वाले प्रशिक्षण की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। जापान अपने देश के भीतर और जरूरत पड़ने पर विदेशों में प्रशिक्षण सुविधाओं की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। Ministry of Defense Japan+1
छोटे हमलावर ड्रोन के प्रशिक्षण पर भी विचार
जापान की योजना केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं है। छोटे हमलावर ड्रोन के प्रशिक्षण की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। ऐसे ड्रोन आधुनिक सैन्य रणनीति में निगरानी और हमले जैसी भूमिकाओं में उपयोग किए जा सकते हैं।
जापान में ड्रोन प्रशिक्षण के दौरान रेडियो फ्रीक्वेंसी, संचार व्यवस्था, नागरिक उपकरणों पर संभावित प्रभाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखना पड़ता है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय भी जरूरी है। भारत में उपलब्ध बड़े सैन्य परीक्षण क्षेत्र जापान के लिए एक संभावित विकल्प बन सकते हैं। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक इस्तेमाल संबंधित तकनीकी आवश्यकताओं, सुरक्षा नियमों और दोनों देशों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। The Diplomat+1
भारत-जापान रक्षा सहयोग को मिल सकता है बढ़ावा
भारत और जापान के बीच पहले से ही रक्षा और सैन्य सहयोग जारी है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण मानते हैं। यदि भविष्य में भारत के परीक्षण केंद्रों के इस्तेमाल पर सहमति बनती है, तो इससे दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
भारत के पास ओडिशा के चांदीपुर सहित मिसाइल परीक्षण से जुड़ा बुनियादी ढांचा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जापान किस विशेष परीक्षण केंद्र का इस्तेमाल करेगा और किन हथियारों के साथ अभ्यास किया जाएगा।
फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती विचार-विमर्श के स्तर पर है। टाइप-25 मिसाइल का भारत में परीक्षण करने या किसी निर्धारित संयुक्त अभ्यास की तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।