भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने भारत समेत 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी एजेंसी का आरोप है कि इन देशों ने कथित तौर पर जबरन श्रम यानी “फोर्स्ड लेबर” से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
इस प्रस्ताव ने वैश्विक व्यापार जगत में नई चर्चा शुरू कर दी है और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
भारत समेत कई बड़े देश सूची में शामिल
USTR द्वारा जारी सूची में भारत के अलावा चीन, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी श्रमिकों और उद्योगों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा कर रही हैं। एजेंसी के मुताबिक, जबरन श्रम से बने उत्पाद कम लागत पर बाजार में पहुंचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है।
कितना लग सकता है अतिरिक्त टैरिफ?
प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर नियंत्रण के लिए कुछ कदम उठाए हैं, उनके उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं अन्य देशों के लिए 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है। कपड़ा और परिधान उद्योग से जुड़े कुछ आयातों के लिए अलग व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि यह अभी केवल प्रस्ताव है और इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
मार्च में शुरू हुई थी जांच
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने बताया कि इस मामले की जांच मार्च 2026 में शुरू की गई थी। जांच के दौरान कई विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के बयान दर्ज किए गए तथा सैकड़ों सार्वजनिक टिप्पणियां प्राप्त हुईं। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर अब यह प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिस पर आगे सार्वजनिक सुनवाई भी होगी।
पाकिस्तान को छूट मिली या नहीं?
प्रस्तावित सूची में भारत, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों का नाम सामने आया है, जबकि पाकिस्तान का उल्लेख प्रमुख सूची में नहीं दिखाई दिया। इसी वजह से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान को किसी तरह की छूट दी गई है।
हालांकि अमेरिकी एजेंसी की ओर से अभी तक पाकिस्तान को लेकर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की गई है। इसलिए इसे आधिकारिक छूट मानना जल्दबाजी होगी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पड़ सकता है असर
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच, कृषि, डिजिटल व्यापार और शुल्क संबंधी मुद्दों पर कई दौर की वार्ता हो चुकी है। ऐसे में नया टैरिफ प्रस्ताव दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को प्रभावित कर सकता है।
6 जुलाई तक मांगी गईं प्रतिक्रियाएं
USTR ने प्रस्तावित उपायों पर 6 जुलाई तक लिखित सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद 7 जुलाई को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। अंतिम निर्णय सुनवाई और प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर लिया जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित शुल्क तुरंत लागू नहीं होंगे। लेकिन यदि