दिल्ली में जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेशी के बाद यह आदेश दिया गया। वहीं, पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलका भरने के बाद जमानत मिल गई। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े कानूनी अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जन्मदिन पर जेल पहुंचे आशुतोष रांका
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा आशुतोष रांका की हो रही है, क्योंकि उन्हें अपने जन्मदिन के दिन ही तिहाड़ जेल जाना पड़ा। पुलिस की कार्रवाई के बाद तीनों नेताओं को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। अजिंक्य शिंदे को पांच हजार रुपये का बेल बॉन्ड भरने और एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर राहत मिली।
दिल्ली पुलिस ने बताई कार्रवाई की वजह
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का दोबारा उल्लंघन करने का आरोप है। पुलिस ने अदालत में दोनों के पुराने रिकॉर्ड और बेल बॉन्ड की कथित शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया। पुलिस का पक्ष था कि ऐसी परिस्थितियों में दोबारा कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की आशंका थी। इसी आधार पर दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्रवाई की गई।
CJP के वकील ने उठाए सवाल
CJP नेताओं की ओर से पेश वकील अभिष्ट हेला ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका दावा था कि नेताओं को इस आशंका के आधार पर हिरासत में भेजा गया कि वे भविष्य में कोई अपराध कर सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन में लोगों को बुलाने और बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन को लेकर गलत तथ्य अदालत के सामने रखे। वकील ने कनॉट प्लेस से जुड़े एक अलग मामले का संदर्भ दिए जाने पर भी आपत्ति जताई।
हालांकि, पुलिस और बचाव पक्ष के दावों के बीच वास्तविक स्थिति का निर्धारण न्यायिक रिकॉर्ड और संबंधित आदेशों के आधार पर ही किया जा सकता है।
संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर साधा निशाना
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के कारण हिरासत में भेजा गया। दीपके ने केंद्र सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया।
दीपके ने पत्रकारों से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने संगठन के आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि CJP एक स्वतंत्र दबाव समूह है और उसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण की कोई योजना नहीं है।
विरोध-प्रदर्शन और कानूनी प्रक्रिया पर फिर चर्चा
CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया पर हिरासत की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने अजिंक्य शिंदे को मिली राहत और अन्य दो नेताओं की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाए।
इस मामले ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शन, प्रतिबंधात्मक आदेशों और बेल बॉन्ड की शर्तों के पालन को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां पुलिस ने कानून-व्यवस्था और कथित उल्लंघन को कार्रवाई का आधार बताया है, वहीं CJP नेताओं ने इसे विरोध की आवाज दबाने की कार्रवाई करार दिया है। मामले से जुड़े आरोपों और दावों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।