न्यूज़ पैकेज | दिल्ली | 24 अक्टूबर 2026
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब विवादित नारों और राजनीतिक बयानबाजी के कारण चर्चा में है। विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर कथित आपत्तिजनक नारे लिखे जाने के बाद प्रशासन, छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इसी बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करने के बाद पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला भी सुर्खियों में है।
जामिया की दीवारों पर कथित विवादित नारे, प्रशासन ने जताई नाराजगी
जामिया परिसर की दीवारों पर कथित आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी निंदा की। प्रशासन के मुताबिक, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में नारों को दीवारों से हटा दिया गया।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नारे किसने लिखे थे और इस मामले में किसी की पहचान हुई है या नहीं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि इस विवाद के जरिए छात्र संघ चुनाव की उनकी मुख्य मांग से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
छात्र संघ चुनाव की तीन प्रमुख मांगें
यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में छात्र संघ चुनाव कराए जाएं। इसके अलावा, छात्रों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और सिक्योरिटी एडवाइजर तथा चीफ प्रॉक्टर को उनके पदों से हटाने की मांग भी उठाई है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्र संघ विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और उनके अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए चुनाव की तारीख जल्द घोषित की जानी चाहिए।
हाईलेवल कमेटी ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय की हाईलेवल कमेटी के अनुसार, छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए ड्राफ्ट कमेटी गठित की गई है। प्रशासन का तर्क है कि संविधान और जरूरी नियम तय होने के बाद ही चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
कमेटी ने 12 अक्टूबर के बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करने की बात भी कही है। हालांकि, छात्रों की नाराजगी इस बात को लेकर बनी हुई है कि संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए समय निर्धारित किए जाने के बावजूद चुनाव की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
13 दिनों से भूख हड़ताल पर छात्र
रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र जासिम अली खान छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से दी गई समयसीमा संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए है, न कि चुनाव कराने के लिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और शिक्षा मंत्रालय से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय होने तक आंदोलन जारी रह सकता है।
ABVP और VHP ने की कार्रवाई की मांग
दीवारों पर कथित विवादित नारे लिखे जाने के मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन से सख्त कदम उठाने की अपील की।
वहीं, एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने आरोप लगाया कि छात्र संघ चुनाव को लेकर चल रहे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इन बयानों के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
इमरान मसूद की हिरासत से बढ़ा राजनीतिक विवाद
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने जामिया पहुंचे थे। मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मसूद ने कहा कि उन्होंने कश्मीर को भारत से अलग करने वाले किसी भी नारे का समर्थन नहीं किया और ऐसे नारों की निंदा की। उन्होंने कथित विवादित पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
इस घटनाक्रम के बीच भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हुई है।
2006 से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव
जामिया में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, विश्वविद्यालय में आखिरी बार 2005 में चुनाव हुए थे। 31 मार्च 2006 को प्रशासन ने हिंसा, अव्यवस्था और पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए निर्वाचित छात्र संघ इकाई को भंग कर दिया था।
इसके बाद भी चुनाव बहाल करने की मांग समय-समय पर उठती रही। मौजूदा आंदोलन के बीच अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम और चुनाव की तारीख पर है।