नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज है। इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि उनका INDIA ब्लॉक से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन वह INDIA ब्लॉक के कार्यक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इस संबंध में कानून में बदलाव करने और नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की मांग की।
‘विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार’
INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उनका INDIA ब्लॉक से कोई संबंध नहीं है और वे उसके कार्यक्रम पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।
ओवैसी के इस बयान को विपक्षी गठबंधन से उनकी राजनीतिक दूरी स्पष्ट करने वाले बयान के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया।
‘हमें प्रधानमंत्री मोदी से शिकायत है’
INDIA ब्लॉक के नेताओं के भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की चर्चा पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि सांसद होने के नाते वे कार्यपालिका का हिस्सा कैसे हो सकते हैं। उन्होंने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के बंटवारे का उल्लेख करते हुए कहा कि तीनों संस्थाओं को अपनी-अपनी भूमिका का ध्यान रखना चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि यदि उन्हें कोई शिकायत है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। उन्होंने इस संदर्भ में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़ी संसदीय समिति के सुप्रीम कोर्ट से मिलने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर जोर दिया।
CEC की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग
AIMIM प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित मौजूदा कानून को रद्द करने या उसमें बदलाव करने की मांग की।
ओवैसी का तर्क है कि नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ CJI की भागीदारी से नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवालों पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, यह ओवैसी की राजनीतिक मांग और उनके विचार हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में किसी बदलाव का निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।
SIR को लेकर भी केंद्र पर सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी विपक्षी दलों और केंद्र सरकार के बीच बहस जारी है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसमें आवश्यक सुधार करना है, जबकि इसके तौर-तरीकों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
ओवैसी ने SIR के मुद्दे को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवालों के साथ उठाया। उनके बयान के बाद INDIA ब्लॉक से उनकी दूरी और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर उनकी मांग राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
फिलहाल, इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, नियुक्ति प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के विचार महत्वपूर्ण हैं।