राष्ट्रीय राजनीति | गुजरात निकाय चुनाव | Dream Sankalp News
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने चुनावी नतीजों को लेकर निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस की चुनावी हार का कारण विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बताना उचित नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार SIR की प्रक्रिया 2024 के बाद लागू हुई, जबकि कांग्रेस कई राज्यों में लंबे समय से चुनाव नहीं जीत पाई है।
अमित शाह ने गुजरात निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि इन परिणामों को राहुल गांधी के लिए सबक के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब मतदान बैलेट पेपर से हुआ, तब भी भाजपा को बड़ी सफलता मिली।
गुजरात निकाय चुनाव के आंकड़ों का दिया हवाला
अमित शाह के मुताबिक, गुजरात में भाजपा ने 90 प्रतिशत नगर निगमों, 66 प्रतिशत नगर परिषदों और 65 प्रतिशत नगर पालिकाओं में जीत दर्ज की। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाए और कहा कि चुनावी हार के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को जिम्मेदार ठहराने वाला तर्क इन परिणामों से मेल नहीं खाता।
गृह मंत्री ने त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को लगभग 77.5 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस 4,600 सीटों में से केवल 14 सीटें जीत सकी। इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने कांग्रेस के संगठन और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए।
बंगाल, त्रिपुरा और गुजरात का किया जिक्र
अमित शाह ने कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे चुनावी प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को 54 साल से और त्रिपुरा में 33 साल से जीत नहीं मिली है। उन्होंने गुजरात का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस वहां भी पिछले 41 वर्षों से चुनाव जीतने में असफल रही है। शाह ने कहा कि इन राज्यों के चुनावी इतिहास को देखते हुए हार के लिए SIR को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए।
SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी को जवाब
राहुल गांधी और विपक्षी दल निर्वाचन आयोग तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की ओर से SIR प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां जताई गई हैं। इसी संदर्भ में अमित शाह ने कहा कि SIR को कांग्रेस की पुरानी चुनावी पराजयों से जोड़ना सही नहीं है।
उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि केवल राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को एकत्र करने और रैली करने से कोई देश की पूरी आवाज नहीं बन जाता। उनके इस बयान को निर्वाचन प्रक्रिया पर विपक्ष के विरोध के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी किया दावा
अमित शाह ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी अपना दावा रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 2029 के आम चुनाव में भारी बहुमत हासिल करेगा और कांग्रेस को फिर हार का सामना करना पड़ेगा। यह शाह का राजनीतिक आकलन और दावा है; 2029 के चुनाव के वास्तविक नतीजे मतदाताओं के फैसले से तय होंगे।
गुजरात निकाय चुनावों के बाद अमित शाह के बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर तेज कर दिया है। जहां भाजपा इन नतीजों को अपने पक्ष में जनसमर्थन के रूप में पेश कर रही है, वहीं SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष के सवाल राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बने हुए हैं।