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अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर मायावती का नया दावा, बोलीं- पूरी रात घोषणा रोकने की कोशिश हुई

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को लेकर चल रहा सियासी घटनाक्रम लगातार चर्चा में है। अशोक सिद्धार्थ के राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने के एक दिन बाद बसपा प्रमुख मायावती ने इस फैसले को लेकर नया दावा किया है। मायावती के मुताबिक, पार्टी की ओर से संन्यास की सलाह दिए जाने के बावजूद अशोक सिद्धार्थ ने तत्काल इसकी घोषणा नहीं की थी।

मायावती ने बताई पूरी रात की कहानी

मायावती के अनुसार, जिस दिन अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह अलग होने की सलाह दी गई, उस दिन उन्होंने तुरंत संन्यास का ऐलान नहीं किया। मायावती का दावा है कि पूरी रात इस घोषणा को रोकने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए गए। जब बात नहीं बनी तो अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास की घोषणा की।

मायावती ने इस घोषणा को लेकर कहा कि सिद्धार्थ ने यह कदम इस सोच के साथ उठाया कि ज्यादा देरी होने पर नुकसान और बढ़ सकता है। उन्होंने उनके ऐलान को ‘किन्तु-परन्तु वाली घोषणा’ भी बताया।

आकाश आनंद को लेकर शुरू हुआ था पूरा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 सितंबर से हुई, जब मायावती ने आकाश आनंद को बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया। हालांकि, उन्हें पार्टी में सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर बने रहने का विकल्प दिया गया।

इसके बाद 9 सितंबर को मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि आकाश आनंद को भविष्य में पार्टी में जिम्मेदारी देने पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें।

अगले ही दिन अशोक सिद्धार्थ का ऐलान

मायावती की शर्त सामने आने के अगले ही दिन, 10 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए सर्वोपरि है।

इसके कुछ ही घंटों बाद मायावती ने आकाश आनंद को भी पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान किया। मायावती ने आकाश पर पार्टी और बहुजन आंदोलन की तुलना में परिवार को अधिक महत्व देने का आरोप लगाया।

मायावती के नए बयान से फिर गरमाई सियासत

अब 11 सितंबर को मायावती के ताजा बयान के बाद यह पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मायावती ने कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को इस घटनाक्रम से जुड़ी और जानकारी दी जाएगी।

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास, आकाश आनंद की पार्टी से दूरी और मायावती के लगातार बयानों ने बीएसपी की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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