दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं का महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर विरोध प्रदर्शन चर्चा में है। दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप की घटना के बाद 23 सितंबर से शुरू हुआ विरोध अब नॉर्थ कैंपस तक पहुंच गया है। प्रदर्शन में छात्राओं ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ महिलाओं की आवाजाही और आजादी से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
कई कॉलेजों की छात्राएं प्रदर्शन में शामिल
विरोध प्रदर्शन में लेडी श्रीराम कॉलेज, मिरांडा हाउस, गार्गी कॉलेज और कमला नेहरू कॉलेज समेत कई कॉलेजों की छात्राओं के शामिल होने की बात सामने आई है। छात्राओं ने कॉलेजों और आसपास के इलाकों में अंधेरी सड़कों, स्ट्रीट लाइट की कमी, सीसीटीवी, पुलिस पेट्रोलिंग और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन जैसे मुद्दे उठाए।
29 सितंबर को नॉर्थ कैंपस में भी बड़ा प्रदर्शन हुआ। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्राएं और LGBTQ समुदाय से जुड़े लोग मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था शामिल रही।
वायरल हुए पोस्टर और नारे
प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे पोस्टर और नारे देखने को मिले, जो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। इनमें “हम औरतें आजाद हैं”, “क्यूटी नहीं, क्रांति हैं हम”, “रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं” और “डर के आगे आजादी” जैसे नारे शामिल हैं।
कुछ पोस्टर्स में छात्राओं ने व्यंग्य और तंज के जरिए भी अपनी बात रखी। “एक कचौरी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा” और “हमारी स्कर्ट नहीं है छोटी, इन मर्दों की सोच है छोटी” जैसे नारे भी प्रदर्शन में दिखाई दिए।
वहीं “बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो” जैसे पोस्टर के जरिए प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर पुरुषों के व्यवहार और जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया।
सुरक्षा के साथ स्वतंत्रता का सवाल
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही पर पाबंदी समाधान नहीं है। उनका जोर सुरक्षित सड़कें, बेहतर स्ट्रीट लाइट, पुलिस व्यवस्था, सीसीटीवी, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन और बेहतर पब्लिक स्पेस तैयार करने पर है।
“हम आजाद हैं सिर्फ पन्नों पर”, “Girls just wanna have fundamental rights” और “We should not need a protest to feel safe” जैसे पोस्टर भी इसी भावना को सामने रखते हैं।
इस प्रदर्शन में सुरक्षा और महिलाओं की स्वतंत्रता दोनों मुद्दे साथ दिखाई दे रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि महिलाओं को डर के कारण घर या हॉस्टल तक सीमित करने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।