Fake Teacher Recruitment | Allahabad High Court | UP Education News 2026
उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे सरकारी नौकरी पाने वालों पर अब बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षकों की नियुक्तियों में फर्जीवाड़े को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को पूरे प्रदेश में व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि जाली सर्टिफिकेट पर नौकरी पाने का “परेशान करने वाला पैटर्न” सामने आ रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
छह महीने में पूरी करनी होगी प्रदेशव्यापी जांच
हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि छह महीने के भीतर पूरे उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर हुई नियुक्तियों की जांच पूरी की जाए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जहां भी अवैध नियुक्ति की पुष्टि होगी:
- नियुक्ति तुरंत रद्द की जाएगी
- अब तक दी गई पूरी सैलरी की रिकवरी होगी
- दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी
फर्जी नियुक्तियों में शामिल अधिकारियों पर भी गाज
कोर्ट ने सिर्फ फर्जी शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में शामिल या लापरवाह अधिकारियों पर भी सख्त टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार कई बार निर्देश और सर्कुलर जारी कर चुकी है, इसके बावजूद जिन अधिकारियों पर पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वे समय रहते कार्रवाई करने में विफल रहे।
कोर्ट ने माना कि यह निष्क्रियता शिक्षा व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार है और इससे छात्रों के हितों को सीधा नुकसान पहुंचता है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
यह आदेश देवरिया की याचिकाकर्ता गरिमा सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
गरिमा सिंह ने बीएसए देवरिया द्वारा 6 अगस्त 2025 को उनकी नियुक्ति रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। जांच में यह सामने आया था कि:
- शैक्षिक दस्तावेज़ जाली थे
- निवास प्रमाण पत्र भी फर्जी था
गरिमा सिंह का दावा था कि उनकी नियुक्ति जुलाई 2010 में हुई थी और वे करीब 15 साल तक सेवा में रहीं, इस दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं हुई।
अदालत ने राहत देने से किया इनकार
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, बरडीहा दलपत, विकास खंड सलेमपुर (देवरिया) में दोबारा सहायक शिक्षक के रूप में बहाल किया जाए।
लेकिन जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि इस मामले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप उचित नहीं है और मांगी गई राहत नहीं दी जा सकती।
आदेश तुरंत लागू करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार कंप्लायंस को निर्देश दिया है कि यह आदेश तुरंत:
- प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा
- प्रिंसिपल सेक्रेटरी (कानून)
- एल.आर., उत्तर प्रदेश सरकार
को भेजा जाए, ताकि कार्रवाई में कोई देरी न हो।