राजधानी दिल्ली

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण, नोएडा के सेक्टर-125 में एक्यूआई 299 तक पहुंचा

बारिश थमने और हवा की रफ्तार कम होने से बढ़े प्रदूषक कण; गाजियाबाद के लोनी में 259 और दिल्ली के आनंद विहार में 271 दर्ज हुआ वायु गुणवत्ता सूचकांक

नई दिल्ली। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बारिश का दौर थमने के बाद वायु गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। हवा की रफ्तार कम होने से वातावरण में धूल और धुएं के कण जमा हो रहे हैं, जिससे दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़ गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-125 में एक्यूआई 299 दर्ज किया गया, जबकि गाजियाबाद के लोनी में यह 259 और दिल्ली के आनंद विहार में 271 रहा। प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

नोएडा के कई इलाकों में खराब हुई हवा

नोएडा में वायु गुणवत्ता के अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर अलग-अलग दर्ज किया गया। सेक्टर-125 में एक्यूआई 299 रहा, जबकि सेक्टर-62 में 239, सेक्टर-116 में 212 और सेक्टर-1 में 142 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि शहर के कुछ हिस्सों में प्रदूषण का दबाव अधिक है। एक्यूआई 201 से 300 के बीच होने पर हवा को सामान्यतः ‘खराब’ श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

गाजियाबाद के लोनी में एक्यूआई 259

गाजियाबाद के विभिन्न निगरानी केंद्रों पर भी वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लोनी में एक्यूआई 259, इंदिरापुरम में 233, वसुंधरा में 230 और संजय नगर में 215 रहा। वेव सिटी में यह 182 और वेद विहार-लोनी में 197 दर्ज किया गया। इसके विपरीत, गोविंदपुरम में एक्यूआई 54 रहा, जिसे संतोषजनक श्रेणी में रखा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों के आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण पूरे जिले में एक समान नहीं है और स्थानीय परिस्थितियां भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।

दिल्ली के कई इलाकों में भी बढ़े प्रदूषक कण

दिल्ली में आनंद विहार में एक्यूआई 271 और चांदनी चौक में 255 दर्ज किया गया। बुराड़ी क्रॉसिंग में यह 197, बवाना में 180 और आया नगर में 143 रहा। कई इलाकों में पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के स्तर में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। पीएम2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इनका अधिक संपर्क विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए चिंता का विषय है।

हवा की धीमी रफ्तार बनी प्रदूषण की वजह

बारिश रुकने के बाद हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां और औद्योगिक उत्सर्जन स्थानीय प्रदूषण में योगदान दे सकते हैं। जब हवा इन कणों को फैलाने में पर्याप्त मदद नहीं करती, तो कुछ क्षेत्रों में एक्यूआई बढ़ सकता है। हालांकि, प्रदूषण के स्तर में बदलाव मौसम, स्थानीय उत्सर्जन और अन्य पर्यावरणीय स्थितियों पर भी निर्भर करता है।

बारिश से मिल सकती है अस्थायी राहत

भारत मौसम विज्ञान विभाग के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, 14 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में सामान्यतः बादल छाए रहने की संभावना थी। 15 और 16 अक्टूबर को आंधी-तूफान के साथ बारिश का पूर्वानुमान बताया गया था। बारिश से हवा में मौजूद कुछ कण जमीन पर बैठ सकते हैं, जिससे प्रदूषण में अस्थायी कमी आ सकती है। हालांकि, बारिश के बाद हवा की गुणवत्ता कितनी सुधरेगी, यह हवा की गति, वर्षा की मात्रा और प्रदूषण के स्रोतों पर निर्भर करेगा।

प्रदूषण के बीच सावधानी जरूरी

वायु गुणवत्ता खराब होने पर लोगों को स्थानीय एक्यूआई की नियमित जानकारी लेते रहना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक प्रदूषण के दौरान बाहर की कठिन शारीरिक गतिविधियां सीमित रखने पर विचार करना चाहिए। आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति पर अब मौसम में बदलाव और आगामी निगरानी आंकड़ों के आधार पर नजर रहेगी।

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