रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में 28 वर्षीय महिला लैब कर्मचारी की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। महिला की मौत गंभीर निमोनिया के बाद हुई और उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर इसे कोरोना महामारी के शुरुआती दौर से जोड़ते हुए ‘वुहान पार्ट-2’ तक कहा जा रहा है। हालांकि, अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि महिला की मौत प्लेग संक्रमण के कारण हुई थी या कथित लैब दुर्घटना से इसका सीधा संबंध था।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्टों के मुताबिक, डारिया शिपिलोवा नाम की 28 वर्षीय लैब तकनीशियन रूस के इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट में काम करती थीं। उन्हें सितंबर के अंत में गंभीर सांस संबंधी लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि लैब में नमूनों पर काम करते समय एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी और उसमें मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आने की आशंका थी। कुछ रिपोर्टों ने इसे Yersinia pestis से जोड़ा, जो प्लेग का कारण बनने वाला बैक्टीरिया है। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 200 लोग मेडिकल निगरानी में
महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया। अस्पताल और संबंधित क्षेत्र में एहतियाती कदम उठाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, निगरानी में रखे गए लोगों में अब तक प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है।
रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिला की मौत को अज्ञात कारण वाले निमोनिया से जोड़ा है और लैब में किसी रोगजनक सूक्ष्मजीव से जुड़ी दुर्घटना से इनकार किया है। बाद की रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि जांच में महिला की बीमारी और उसके काम के बीच संबंध का कोई पुष्ट प्रमाण नहीं मिला।
क्यों हो रही ‘वुहान पार्ट-2’ की चर्चा?
कोरोना महामारी के बाद दुनिया में किसी भी लैब दुर्घटना की खबर तुरंत चिंता पैदा करती है। इस मामले में एंटी-प्लेग लैब, एक कर्मचारी की मौत, कथित टेस्ट ट्यूब टूटने और लोगों को निगरानी में रखे जाने जैसी खबरों के कारण सोशल मीडिया पर इसकी तुलना वुहान से की जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञों और फैक्ट-चेक रिपोर्टों के मुताबिक इसे वुहान जैसी घटना कहना अभी जल्दबाजी होगी। न तो प्लेग संक्रमण की पुष्टि हुई है और न ही लैब लीक का स्वतंत्र प्रमाण सामने आया है।
WHO ने मांगी ज्यादा जानकारी, जोखिम फिलहाल कम
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस से मामले के बारे में अधिक जानकारी मांगी है। WHO ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी पूरी नहीं है, लेकिन मौजूदा आकलन में सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम कम माना जा रहा है।
इस मामले ने एक बार फिर खतरनाक रोगजनकों पर काम करने वाली प्रयोगशालाओं में बायोसेफ्टी, पारदर्शिता और समय पर जानकारी साझा करने की अहमियत को सामने ला दिया है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जांच पूरी होने तक अपुष्ट दावों को महामारी या लैब लीक की पुष्टि के रूप में पेश न किया जाए।